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कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम, निषेध और निवारण 2026
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (एमडब्ल्यूसीडी) के निर्देशों का पालन करते हुए, नए श्रम संहिताओं ने विस्तारित कार्य अवसर और सुरक्षा प्रदान की है: महिलाओं को अब सभी प्रकार के कार्यों के लिए सभी प्रतिष्ठानों में काम करने की अनुमति दी गई है, जिसमें रात्रि पाली (नाइट शिफ्ट) और जोखिमपूर्ण उद्योग भी शामिल हैं, बशर्ते वे अपनी सहमति दें और नियोक्ता यह सुनिश्चित की जाए कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय, सुविधाएँ एवं परिवहन की व्यवस्था उपलब्ध हों, यह माननीय प्रधानमंत्री की वर्ष 2047 तक ‘विकसित भारत’ के लिए महिला-नेतृत्वित विकास की परिकल्पना के अनुरूप है।
लैंगिक उत्पीड़न को रोकने और उसका समाधान करने के लिए कार्यस्थलों को जवाबदेह बनाने वाले एक महत्वपूर्ण कानून, लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम 2013 (संलग्न) का पालन करते हुए, न्याय मांगने के लिए एक स्पष्ट, संरचित प्रक्रिया के साथ महिलाओं को सशक्त बनाना और एक सम्मानजनक, सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना, लैंगिक उत्पीड़न अधिनियम, 2013 (एसएच अधिनियम) के प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 'कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' और एसएच-बॉक्स पोर्टल के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए गुरुवार, 08 जनवरी, 2026 को शाम 4:00 बजे सी. वी. रमन हॉल में 'कार्यस्थल पर महिलाओं का लैंगिक उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013' के भाग के रूप में एक दिवसीय व्याख्यान सह जागरूकता सत्र का आयोजन किया गया है।
वक्ता: प्रोफेसर श्रीमोंती सरकार (बायोकेमिस्ट्री विभाग, बोस इंस्टीट्यूट)
व्याख्यान का शीर्षक: संगठनात्मक विकास के लिए एक उत्प्रेरक के रूप में लैंगिक समावेशिता
वक्ता : सुश्री मधुरिमा दे सरकार (मनोवैज्ञानिक परामर्शदाता, आईएसीएस)
व्याख्यान का शीर्षक: जागरूकता से कार्रवाई तक: कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न की रोकथाम
एतद्द्वारा समस्त संकाय सदस्यों, गैर-संकाय कर्मचारियों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों को इसमें सम्मिलित होने हेतु सादर आमंत्रित किया जाता है।